27 साल बाद हिमाचल में सरकारी लॉटरी की वापसी, CM की मंजूरी के बाद जारी होगा टेंडर
Government lottery returns to Himachal after 27 years
शिमला। Government lottery returns to Himachal after 27 years, हिमाचल प्रदेश में 27 वर्ष बाद सरकारी लॉटरी की वापसी का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन टेंडर प्रक्रिया में देरी के कारण पहले वित्त वर्ष में अपेक्षित राजस्व मिलना मुश्किल दिख रहा है। सरकार और राज्यपाल ने लाटरी संचालन को मंजूरी दे दी है और हिमाचल प्रदेश राज्य लाटरी (विनियमन) नियम-2026 भी अधिसूचित हो चुके हैं। हालांकि टेंडर से जुड़ी फाइल अभी मुख्यमंत्री की मंजूरी का इंतजार कर रही है।
सरकार को अधिकारियों ने लॉटरी से वार्षिक करीब 100 करोड़ रुपये की आय का अनुमान दिया था, लेकिन वित्त वर्ष के चार माह बीत जाने के कारण पहले वर्ष में महज 10 से 20 करोड़ रुपये की आय होने की संभावना है। नियमित संचालन के बाद भी वार्षिक राजस्व करीब 50 करोड़ रुपये तक रहने का अनुमान
पंजाब की तर्ज पर शुरुआत
सरकार आर्थिक तंगी और 1.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज के बीच गैर-कर राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से पंजाब, सिक्किम और केरल की तर्ज पर लाटरी शुरू कर रही है।
सीएम की मंजूरी मिलते ही होगा टेंडर
मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलते ही राज्य कोषागार एवं लॉटरी विभाग टेंडर जारी करेगा। देश की तीन-चार प्रमुख लॉटरी कंपनियां इसमें भाग लेंगी। चयनित कंपनी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम से लॉटरी संचालित करेगी।
10 से 500 रुपये के टिकट मिलेंगे
10 रुपये से लेकर 100 और 500 रुपये तक के टिकट उपलब्ध होंगे, जबकि एक कैलेंडर वर्ष में अधिकतम छह बंपर ड्रा आयोजित किए जा सकेंगे।
1999 में लगा था प्रतिबंध
प्रदेश में वर्ष 1999 के आसपास सरकारी लाटरी पर वित्तीय अनियमितताओं, धोखाधड़ी और जुए की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण प्रतिबंध लगा दिया गया था। अब सरकार ने कड़े सुरक्षा प्रबंधों के साथ इसे दोबारा शुरू करने का फैसला किया है।